हिंदी विश्व में भारतीय अस्मिता की पहचान है। हिंदी भारत की राजभाषा,राष्ट्रभाषा से आगे विश्वभाषा बनने की ओर अग्रसर है।
Saturday, October 2, 2021
गाँधी -शास्त्री जयंती और मूल्य-बोध
आज गाँधी जी की 152वीं जयंती है। साथ में लाल बहादुर शास्त्री जी की भी। ब्रिटिश भारत से आजाद होने के बाद भारत के सबसे बड़े नायक की जन्म जयंती पर शत शत नमन! पर यह हम सभी का दुर्भाग्य है कि दशकों से उनके विचारों को जानबूझकर ढकोसला बनाकर ही परोसा जा रहा है। हमारे शासक, नौकरशाह, पत्रकार, न्यायालय, शिक्षाविद् सामूहिक रूप से ब्रिटिश भारत से आजादी के बाद गांधी जी के सपनों के भारत के हर लक्ष्य को मटियामेट करने में कोई कर-कसर नहीं छोड़े है। चाहे हिंदी एवं भारतीय भाषाओं को कलंकित कर अंग्रेजी को बढावा देने की बात हो या कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवित न कर भारी उद्योगों की स्थापना की बात हो, ग्रामीण भारत को अस्तित्वविहीन कर नियोजित शहरों की स्थापना की बात हो, समाज के बुनियादी तत्वों को समाप्त करने में सहयोग और सत्ता ही मूलमंत्र है। दरअसल गांधी का खात्मा उनके अनुयायियों ने पहले किया। दुर्भाग्य यह रहा है कि जिनकी वजह से सत्ता में पहुँचे उन्हीं के उसूलों का खात्मा किया जाना आधुनिक भारत में नैतिकता विहीन समाज की नींव रखने की प्राथमिक सीढ़ी बनी। पर हमारे समाज की आदत सी बन गई है हम केवल पुरखों पर माल्यार्पण करते है पर उनके उसूलों, मूल्यों से दूर भागते है। अब ऐसे में भगवान ही मालिक है। #गाँधीजी
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
विश्व पुस्तक दिवस पर विचार
विश्व पुस्तक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! बधाई! साहित्य और लोक व्यवहार जीवन को जानने का सबसे बड़ा जरिया है । यह जीवन का कटु यथार्थ है कि हम ...
-
आज महान देशभक्त, भारतरत्न, भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की १२२ वीं जयंती है। भारत-पाक युद्ध में जय जवान! जय किसान! का उद्...
-
माननीय भारत गणराज्य के राष्ट्रपति माननीय प्रधानमंत्री, भारत माननीय मुख्यमंत्री, बिहार माननीय मुख्य सचिव, बिहार माननीय सांसद , सारण संसदी...
-
आज एक समूह में तर्क पर बहस हो रहा था । मेरे मन में तर्क से आगे ‘प्रज्ञा’ के संबंध में कुछ भाव उपजें, जिसे आप सभी से साझा कर रहा हूँ। तर्क और...

No comments:
Post a Comment