आज विश्व रेडियो दिवस है। अब यह एक स्थापित तथ्य है कि संचार के शक्तिशाली और कम लागत वाले संचार उपकरण के रूप में रेडियो सर्वाधिक लोकप्रिय संचार साधन है । रेडियो ने विशेष रूप से दूरस्थ समुदायों और समाज के कमजोर वर्गों निरक्षर, विकलांग व्यक्ति, महिलाएं, युवा और आर्थिक रूप से वंचित समूहों तक ज्ञान-विज्ञान, मनोरंजन एवं जागरूकता पहलों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । आज भारत का राष्ट्रीय प्रसारक और प्रमुख सार्वजनिक सेवा प्रसारक आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर), विश्व के सबसे बड़े प्रसारण संगठनों में से एक है। इसकी घरेलू सेवा में देश भर में 400 से अधिक स्टेशन शामिल हैं, जो भारत के लगभग 92 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र और कुल जनसंख्या के 99.19 प्रतिशत तक पहुंचते हैं। आकाशवाणी 23 भाषाओं और 146 बोलियों में कार्यक्रम प्रसारित करता है, जो देश की समृद्ध भाषाई विविधता को दर्शाता है। यह सुखद संयोग है कि इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (21 फरवरी) पर प्रसारण के निमित्त विशेष परिचर्चा ‘भाषा की मर्यादा’ कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग के लिए विषय विशेषज्ञ के रूप में आकाशवाणी, हैदराबाद (AIR) जाने का अवसर मिला। इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ के रूप में हिन्दी के विद्वान स्नेहमयी व्यवहार के धनी प्रो. ऋषभदेव शर्मा जी का भी सान्निध्य मिला । कार्यक्रम का प्रसारण अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर किया जाएगा । अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (21 फरवरी) पर प्रसारण के निमित्त विशेष परिचर्चा की रिकॉर्डिंग। विशेषज्ञ - डॉ. साकेत सहाय और प्रो. ऋषभदेव शर्मा। सूत्रधार- सीमा कुमारी, सहायक निदेशक का विशेष धन्यवाद
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