आज महान कवि सुब्रमण्यम भारती जी की जयंती है। आज 'भारतीय भाषा दिवस' भी है। सुब्रमण्यम भारती प्रसिद्ध हिंदी-तमिल कवि थे, जिन्हें महाकवि भरतियार के नाम से भी जाना जाता है आप एक कवि होने के साथ-साथ स्वाधीनता सेनानी, समाज सुधारक, पत्रकार एवं उत्तर व दक्षिण भारत के मध्य एकता सेतु के समान थे। सुब्रह्मण्यम भारती ने तमिलनाडु में हिंदी का परचम फहराया था। सुब्रमण्य भारती राष्ट्रवादी काल (1885-1920) के महान भारतीय लेखक, कवि, संगीतकार, पत्रकार, शिक्षक, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और बहुभाषी थे। उनका जन्म 11 दिसंबर, 1882 को मद्रास प्रेसीडेंसी के 'एट्टायपुरम' में हुआ था। उन्हें आधुनिक तमिल साहित्य शैली का जनक माना जाता है। वे मद्रास (चेन्नई) में तमिल दैनिक समाचार पत्र स्वदेशमित्रन से जुड़े। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ का तमिल भाषा में अनुवाद किया, जो अत्यंत लोकप्रिय हुआ। उन्हें महाकवि भरतियार के नाम से भी जाना जाता है। भारती तमिल भाषा में सृजन करने वाले भारत के महान कवियों में से एक थे। भारती की देश प्रेम की रचनाओं से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोग आजादी की लड़ाई में शामिल हुए थे। उनकी प्रसिद्ध रचना
‘कहकर वंदे मातरम्, नमन करें इस देश को ॥1॥
मोद मनाया है यहीं जुन्हाई में हंसकर क्वाँरेपन का। कहकर वंदे मातरम्, नमन करें इस देश को॥ 2॥‘
महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती को ‘भारतीय भाषा दिवस' के रूप में मनाया जाता है। प्रति वर्ष भारतीय भाषा दिवस 11 दिसंबर को मनाया जाता है, जो तमिल कवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती है, और इसका उद्देश्य भारत की भाषाई विविधता को बढ़ावा देना, भाषाई सद्भाव स्थापित करना और भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर देना है। भारत की सभी भाषाएं हमारी धरोहर हैं। हमारी भाषाओं में बहुत समानता है। कहा जा सकता है कि “भाषाएं अनेक किंतु भाव में एकात्मकता की प्रतीक है।” भारतीय भाषाओं के स्थानीय प्रभाव स्वाभाविकता के प्रतीक है। विविधता में एकता हमारी विशिष्टता है। अपनी मातृभाषा एवं अपनी मातृभूमि की भाषाओं का सम्मान और उनका अधिकतम प्रयोग श्रेयस्कर है। हिंदी राष्ट्रीय एकता की कड़ी एवं सदियों से हमारी संबल है।आइए, हिंदी एवं सामस्त भारतीय भाषाओं को और अधिक करीब लाएं। उनका सम्मान और प्रयोग बढ़ाएं। इस अवसर पर प्रसिद्ध पत्रिका “धर्मयुग" में सितंबर, 1993 के अंक में डॉ मुकेश श्रीधर का आलेख ।
#साकेत_विचार 

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