हिंदी विश्व में भारतीय अस्मिता की पहचान है। हिंदी भारत की राजभाषा,राष्ट्रभाषा से आगे विश्वभाषा बनने की ओर अग्रसर है।
अटल बिहारी वाजपेयी का काव्य व्यक्तित्व
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अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व उनकी कविताओं से झलकता हैं । कृतित्व को नमन! https://www.hindi.awazthevoice.in/lifestyle-news/Atal-Bihari-Vajpayee-s-personality-is-reflected-in-his-poems-11169.html
आज महान देशभक्त, भारतरत्न, भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की १२१वीं जयंती है। भारत-पाक युद्ध में जय जवान! जय किसान! का उद्घोष करने वाले शास्त्रीजी की जयंती पर उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को शत शत नमन! आज बहुत कम लोगों को यह ज्ञात होगा कि वे पंजाब नैशनल बैंक के निष्ठावान ग्राहक भी रहे। इस पुण्य अवसर पर शास्त्री जी से जुड़ा यह संस्मरण हम सभी के लिए प्रेरक कथा की भांति है। तथ्य यह है कि अपनी सादगी भरी जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध शास्त्री जी की पत्नी ललिता शास्त्री जी ने लाल बहादुर शास्त्री जी के ताशकंद में हुए असामयिक निधन के बाद पीएनबी से लिए गए कार लोन की बची हुई ₹5,000 की राशि को सरकार से ऋण माफ़ी की मिली पेशकश को मना कर अपनी बची हुई पेंशन राशि से चुकाई थी। यह उनके कर्तव्यनिष्ठा का शानदार उदाहरण है। शास्त्री जी के कार ख़रीदने से जुड़े वाक़ये को सुनकर हम सभी बहुत कुछ सीख सकते हैं। यह घटना वर्ष 1964 की है। चूँकि प्रधानमंत्री बनने के बाद भी शास्त्री जी के पास अपना घर तो क्या एक कार तक नहीं थी। लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को वाराणसी के पास ...
आज़ भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), हैदराबाद में भाषा मंथन परिचर्चा के तहत विशिष्ट अतिथि के रूप में मुझे जाने का सुअवसर मिला। इस अवसर पर मैंने अपने संबोधन में कहा कि भाषाएँ केवल रोज़गार की वाहक नहीं होती बल्कि संस्कार एवं संस्कृति की प्रधानत: वाहक होती है । साथ ही, व्यवहार, संपर्क और राष्ट्रीयता की भी । हिंदी भारत की संपर्क, जुड़ाव और लगाव की भी आग्रही भाषा है। हाल के दशक में विशेष रूप से उदारीकरण के बाद भाषाओं को समाज, आडंबर और राजनीति ने गहरे तौर पर प्रभावित किया है । साथ ही हमारी भाषा और संस्कृति पर भी इसने गहरा असर डाला है। हम ग्लोबल बनने के चक्कर में अपने गाँव, घर, समाज से दूर होते जा रहे हैं।हम चरम नकलची लोग अपने अक़्ल को किसी और के सिरहाने छोड़ आए हैं । इससे हर कोने में अपसंसकृति व्याप्त है । हमारी भाषा और संस्कृति को इस प्रभाव ने मैली और प्रदूषित किया है। जब हमारी भाषाएँ प्रदूषित होंगी तो संस्कृति भी प्रदूषित होंगी ही । अत: हमें अपनी भाषाओं के प्रयोग और व्यवहार को बढ़ाना ही होगा और यह वृहत्तर भारतीय समाज की भी महती जिम्मेदारी है । सादर, डा. साकेत सहाय ...
प्रयागराज कुंभ हादसा-एक अनहोनी थी, जो घट गई। प्रयागराज में जो हुआ दुखद है, अत्यंत दुखद। प्रयागराज कुंभ में भगदड़ मचने की वजह से असमय ही कुछ लोग काल-कवलित हो गए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन महाकुंभ जैसे अपार जनभागीदारी वाले आयोजन को जिस सुव्यवस्थित तरीके से अब तक आयोजित किया गया, उसे किसी अनहोनी से कमतर नहीं करार दिया जा सकता। अगलगी और फिर भगदड़ के मामले को जिस तीव्रता से नियंत्रित कर स्थिति को सामान्य बनाया गया, यह भी तो गौरतलब है। मैं जहाँ पदस्थापित हूँ उस सुदूर दक्षिण से कई मेरे परिचित सपरिवार महाकुंभ गए, ट्रेन से गए, वहां ठहरे और स्नान संपन्न कर लौट आए। वे सभी उत्साह से परिपूर्ण थे। उन्होंने कहा, करोड़ों लोगों की आवाजाही के बावजूद कुम्भ नगरी की सफाई व व्यवस्था चकित करती थी। उनके लिए सबसे उल्लेखनीय प्रशासन व पुलिस का सहयोग था, जो किसी भी छोटे-बड़े सहयोग के लिए तत्पर दिखते थे। इतने बड़े आयोजन में, दुनिया भर में अनेकों ऐसे उदाहरण है जहाँ अनियंत्रित या अज्ञात भय से अव्यवस्था मची, यहाँ भी भगदड़ मचने की वजह से कुछ लोगों की मौत हुई, जिसे प्रशासनिक चूक या अनहोनी दोनों...
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