सब कुछ पाने की होड़ ने मानव होने के धर्म को पीछे छोड़ दिया है । सबसे जरूरी है नैतिकवान होना।
हिंदी विश्व में भारतीय अस्मिता की पहचान है। हिंदी भारत की राजभाषा,राष्ट्रभाषा से आगे विश्वभाषा बनने की ओर अग्रसर है।
Sunday, December 19, 2021
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विश्व पुस्तक दिवस पर विचार
विश्व पुस्तक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! बधाई! साहित्य और लोक व्यवहार जीवन को जानने का सबसे बड़ा जरिया है । यह जीवन का कटु यथार्थ है कि हम ...
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आज महान देशभक्त, भारतरत्न, भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की १२२ वीं जयंती है। भारत-पाक युद्ध में जय जवान! जय किसान! का उद्...
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माननीय भारत गणराज्य के राष्ट्रपति माननीय प्रधानमंत्री, भारत माननीय मुख्यमंत्री, बिहार माननीय मुख्य सचिव, बिहार माननीय सांसद , सारण संसदी...
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आज एक समूह में तर्क पर बहस हो रहा था । मेरे मन में तर्क से आगे ‘प्रज्ञा’ के संबंध में कुछ भाव उपजें, जिसे आप सभी से साझा कर रहा हूँ। तर्क और...
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