Thursday, April 23, 2026

विश्व पुस्तक दिवस पर विचार

 विश्व पुस्तक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! बधाई!



साहित्य और लोक व्यवहार जीवन को जानने का सबसे बड़ा जरिया है । यह जीवन का कटु यथार्थ है कि हम अत्यधिक योग्यता से भय खाते हैं और उससे असुरक्षित महसूस करते हुए उसके रास्तों को छोटा करने का प्रयास करते हैं या किसी अयोग्य को डोर थमा देते हैं परंतु भूल जाते हैं कि बिगाड़ने वाले से बड़ा बनाने वाला होता है । जीवन की राह में नि: संदेह कुछ बिगाड़ने वाले हैं, रास्ते काटने वाले हैं, तो निश्चित ही कुछ बनाने वाले भी होंगे, राह बनाने वाले भी होंगे ही, इसलिए अपना काम करते रहिए । दुनिया है,  ऐसी ही थी, ऐसी ही रहेगी । जिसके भाग्य और पुरुषार्थ का जो है वह उसे मिल ही जाता है, सबकुछ केवल आपका नहीं हो  सकता। सबके अपने हिस्से हैं, सबका अपना आकाश और उस आकाश को पाने हेतु यत्न कीजिए । जो मिलना है वह मिलेगा । 

खूब पढ़िए, ✍️ लिखिए 

जीवन के सफ़र का आनंद लीजिए!

-डॉ साकेत सहाय

विश्व पुस्तक दिवस पर विचार

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