फाँसी की बलिवेदी पर चढ़ने वाले बिहार के प्रथम शहीद रामदेनी सिंह



आज शहीद रामदेनी सिंह जी का शहीदी दिवस है।  वर्ष 1904 में मलखाचक, दिघवारा, सारण में जन्मे रामदेनी सिंह जी की काकोरी कांड में महत्वपूर्ण भूमिका रही।  आप बिहार के प्रथम स्वतन्त्रता सेनानी हैं जिन्हें फांसी की सजा हुई थी।  सरदार भगत सिंह ने आपकी बहादुरी की सराहना करते हुए उन्हें  सारण का एरिया कमांडर मनोनीत किया था।  आपको शत शत नमन !


साभार- दैनिक भास्कर ०४.०५.२०२०

जरा याद करो कुर्बानी: बिहार के प्रथम शहीद थे सारण के रामदेनी सिंह

भारत माता का जयघोष कर फांसी के फंदे को चूम कर झूल जाने वाले रामदेनी सिंह थे

“वहां न कोई तुरबत है और न इंकलाबे-मशाल। उनके मजारों पर दिलकश नजारा है ‘

राणा परमार’ 

जो वतन के साथ मक्कारी की और आज है माला माल जी हां सारण के दिघवारा प्रखंड का मलखाचक गांव भी नहीं जानता कि बिहार में इंकलाब जिंदाबाद! वंदेमातरम!! भारत माता की जय का जयघोष कर फांसी के फंदे को चूम कर झूल जाने वाला और कोई नहीं सारण शेर ठाकुर रामदेनी सिंह था।

लाहौर षड्यंत्र, चौराचौरी कांड, काकोरी षड्यंत्र से उद्वेलित ठाकुर रामदेनी सिंह के धमनियों का लहू उबलने लगा और अपने मित्र व वैशाली एरिया कमांडर योगेन्द्र शुक्ल के साथ मिलकर धन संग्रह की योजना बनायी ताकि उग्र राष्ट्रवादी विचारधारा को बल मिले। बहरहाल, हाजीपुर रेलवे स्टेशन ट्रेन में डाका डाला गया, गार्ड व स्टेशन मास्टर को मार कर खजाना लूट लिया गया और रकम लेकर हाजीपुर पुल पार कर सारण की सीमा में प्रवेश करना ही चाह रहे थे कि सारण व वैशाली पुलिस ने पुल के पूरब पश्चिम घेर लिया।

लिहाजा, दोनों साइकिल सवार वीर साइकिल सहित गंडक नदी में कूद पड़े और साइकिल सहित पटना साहिब घाट पर जा निकले। ब्रिटिश सरकार ने रामदेनी सिंह की गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित की और एक ग्रामीण गद्दार की गद्दारी से गंगा स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दे रहे सिंह सुरमा को जाल फेंक कर पकड़ लिया, पुलिस ने। मुजफ्फरपुर जेल में एक विशेष अदालत गठित की गई।

4 मई 1932 को वीर रामदेनी सिंह को फांसी दे दी गई

अपील का अवसर दिए बिना 4 मई 1932 को वीर रामदेनी सिंह को फांसी दे दी गई । बिहार के पहले शहीद में शुमार रामदेनी सिंह की कोई न तस्वीर है उनके वंशजों के पास न कोई समाधि । अखाड़ा घाट मुजफ्फरपुर में ब्रिटिश शासन ने शव दाह कर दी।

सरदार भगत सिंह ने उनकी बहादुरी की सराहना करते हुए सारण का एरिया कमांडर मनोनीत कर दिया

1904 में दिघवारा प्रखंड के मलखाचक गांव में एक कृषक क्षत्रिय परिवार में जन्मे रामदेनी सिंह 1921 में ही स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े । तब मलखाचक गांधी कुटीर नरम दल व गरम दल के नेताओं की शरण स्थली थी। सरदार भगत सिंह 1923 में अपने साथियों सहित ‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन ‘ की विचारधारा को प्रसारित करने आए थे । स्वर्गीय स्वतंत्रता सेनानी लालसा सिंह ने 2003 में बताया था कि सरदार भगत सिंह और बबुआन रामदेनी सिंह की कुश्ती भी हुई थी और सरदार भगत सिंह ने उनकी बहादुरी की सराहना करते हुए सारण का एरिया कमांडर मनोनीत कर दिया ।

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