महादेवी वर्मा

आज हिंदी साहित्य की महान साहित्यकार महादेवी वर्मा (२६ मार्च १९०६ - ११ सितम्बर १९८७) की जयंती है ।  आप महान कवियित्री, निबंधकार, रेखाचित्रकार और हिन्दी साहित्य की प्रख्यात हस्ती थीं। आपको हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माना जाता है। महादेवी का जन्म 26 मार्च 1907 को प्रातः 8 बजे फ़र्रुख़ाबाद उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। उनके परिवार में लगभग 200 वर्षों या सात पीढ़ियों के बाद पहली बार पुत्री का जन्म हुआ था। अतः बाबा बाबू बाँके विहारी जी हर्ष से झूम उठे और इन्हें घर की देवी — महादेवी मानते हुए पुत्री का नाम महादेवी रखा। कायस्थ पुत्री महादेवी वर्मा ने अपने बचपन में सबसे पहली पुस्तक पंचतंत्र पढ़ी। महादेवी वर्मा के परिवार में बाबा फ़ारसी और उर्दू जानते थे। पिता ने अंग्रेज़ी पढ़ी थी। परिवार में हिंदी का कोई वातावरण नही था। प्रसिद्ध कवियित्री महादेवी वर्मा को अपने निजी जीवन में कई तरह के दुखों का सामना करना पड़ा था।  विरह, वेदना, और करुणा उनकी कविता का अहम हिस्सा है।  महादेवी वर्मा रहस्यवाद और छायावाद की कवयित्री थीं, अतः उनके काव्य में आत्मा-परमात्मा के मिलन विरह तथा प्रकृति के व्यापारों की छाया स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती है। वेदना और पीड़ा महादेवी जी की कविता के प्राण रहे। उनका समस्त काव्य वेदनामय है। उन्हें निराशावाद अथवा पीड़ावाद की कवयित्री कहा गया है।उन्होंने प्रकृति के माध्यम से जीवन की गहराइयों को उजागर किया। महादेवी वर्मा न केवल कवयित्री थीं, बल्कि संगीत और चित्रकला में भी निपुण थीं। उनके गीतों में संगीत का नाद-सौंदर्य स्पष्ट झलकता है। उनके लेखन ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया और उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है। 

महादेवी वर्मा की प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं - नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, यामा और दीपशिखा । कविता के अतिरिक्त उन्होंने सशक्त गद्य भी रचा है, जिसमें रेखाचित्र तथा संस्मरण प्रमुख हैं। पथ के साथी, अतीत के चलचित्र तथा स्मृति की रेखाएँ उनकी कलात्मक गद्य रचनाएँ हैं । 

महादेवी यों ही उनका नाम नहीं था।  हिंदी साहित्य के महान कवि निराला महादेवी को 'सरस्वती' नाम से पुकारते थे. उन्हें आधुनिक युग की 'मीरा' भी कहा जाता है।  

उनका प्रसिद्ध उद्धरण -कष्ट और विपत्ति मनुष्य को शिक्षा देने वाले श्रेष्ठ गुण हैं, जो साहस के साथ उनका सम्मान करते हैं। - महादेवी वर्मा


इस अवसर पर उनकी प्रसिद्ध रचना-


बया हमारी चिड़िया रानी


बया हमारी चिड़िया रानी

तिनके लाकर महल बनाती,


ऊँची डाली पर लटकाती,

खेतों से फिर दाना लाती,


नदियों से भर लाती पानी।

तुझको दूर न जानें देंगे,


दानों से आँगन भर देंगे,

और हौज में भर देंगे हम,


मीठा-मीठा ठंडा पानी।

फिर अंडे सेयेगी तू जब,


निकलेंगे नन्हें बच्चे तब,

हम लेंगे उनकी निगरानी।


फिर जब उनके पर निकलेंगे,

उड़ जाएँगे बया बनेंगे,


हम तब तेरे पास रहेंगे

तू मत रोना चिड़िया रानी।

स्रोत :पुस्तक : वीणा (पृष्ठ 25) रचनाकार : महादेवी वर्मा प्रकाशन : एनसीईआरटी  संस्करण  : 2022


-संकलनकर्ता-डा. साकेत सहाय 

#साकेत_विचार

Comments

Popular posts from this blog

लाल बहादुर शास्त्री - पंजाब नैशनल बैंक के कर्त्तव्यनिष्ठ ग्राहक

भारतीय मानक ब्यूरो (बी आई एस) में व्याख्यान

प्रयागराज कुंभ हादसा-एक अनहोनी थी, जो घट गई।