कवि नरेश मेहता

 



सुविचार

“सच तो यह है कि समय अपने बीतने के लिए किसी की भी स्वीकृति की प्रतीक्षा नहीं करता।‘’ – श्रीनरेश मेहता


आज ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित नरेश मेहता की जयंती है।  आप हिंदी के यशस्वी कवि एवं उन शीर्षस्थ लेखकों में से हैं जो भारतीयता की अपनी गहरी दृष्टि के लिए जाने जाते हैं।  नरेश मेहता ने आधुनिक कविता को नयी व्यंजना के साथ नया आयाम दिया। उनकी एक कविता ‘वृक्ष-बोध’


वृक्ष -बोध


-श्रीनरेश मेहता


आज का दिन

एक वृक्ष की भाँति जिया

 

और प्रथम बार वैष्णवी संपूर्णता लगी।

अपने में से फूल को जन्म देना

 

कितना उदात्त होता है

यह केवल वृक्ष जानता है,

 

और फल—

वह तो जन्म-जन्मांतरों के पुण्यों का फल है।

 

स्तवक के लिए

जब एक शिशु ने फूल नोंचे

 

मुझे उन शिशु-हाथों में

देवत्व का स्पर्श लगा।

 

कितना अपार सुख मिला

जब किसी ने

 

मेरे पुण्यों को फल समझ

ढेले से तोड़ लिया।

 

किसी के हाथों में

पुण्य सौंप देना ही तो फल-प्राप्ति है,

 

सिंधु को नदी

अपने को सौंपती ही तो है।

सच आज का दिन

एक वृक्ष की भाँति जियया 

और प्रथम बार वानस्पतिक समर्पणता जगी।


स्रोत :पुस्तक : रचना संचयन (पृष्ठ 75) संपादक : प्रभाकर श्रोत्रिय रचनाकार : श्रीनरेश मेहता  प्रकाशन : साहित्य अकादेमी संस्करण  : 2015

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