स्वामी दयानंद सरस्वती
आज 12 फरवरी है। स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती है। स्वामी दयानंद सरस्वती ने सनातन सभ्यता के महान ग्रंथ ‘वेदों की ओर लौटो’ का आह्वान किया। आधुनिक भारत के महान् चिंतक, धर्मवेत्ता, समाज सुधारक, “आर्य समाज" के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी, 1824 को काठियावाड़ (गुजरात) के टंकारा गांव में हुआ था। उनके बचपन का नाम मूलशंकर था। वे संन्यासी थे और संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे । आप 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सनातन पंथ के पुनरुद्धार आंदोलन के सबसे बड़े प्रणेता माने जाते हैं। ब्रिटिश सरकार द्वारा 1813 में चार्टर एक्ट लाए जाने के बाद ईसाई पादरियों ने पर्याप्त संख्या में भारत आना आरंभ कर दिया था। इन ईसाई धर्म प्रचारकों ने षडयंत्रपूर्वक सामाजिक कुरीतियों को हिंदू धर्म में सम्मिलित कर कठोर आघात पहुँचाएं । 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारत में कई सामाजिक व धार्मिक आंदोलन हुए। स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपने गुरु मथुरा के स्वामी विरजानंद से वेदों का ज्ञान प्राप्त करके हिंदू धर्म सभ्यता और भाषा के प्रचार का कार्य आरंभ किया। आपने सत्यार्थ प्रकाश की रचना हिंदी में करके राष्ट्रभाषा को गौरव दिलाया। 1875 में आपने आर्य समाज की स्थापना की। आर्य समाज ने हिंदू धर्म और समाज सुधार हेतु कई महत्वपूर्ण कार्य किए।
-डॉ साकेत सहाय
भाषा एवं संचार विशेषज्ञ
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