🎂 एक केक, एक नाम और एक छोटी-सी जिद… ❤️
केक लेने पहुँचे हैदराबाद स्थित आयंगर बेकरी 🥯।
केक पसंद करने के बाद दुकानदार से कहा—
“भाई, केक के ऊपर बच्चे का नाम हिंदी में लिखना है।”
उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोला—“हिंदी तो सिर्फ बोलने और सबको जोड़ने वाली भाषा है। आप फ़िज़ूल में लिखने की बात कर रहे हैं। दुनिया अंग्रेज़ी के पीछे भाग रही है और आप हिंदी लिखवाने की बात कर रहे हैं। हिंदी में लिखना आता भी नहीं… काफी साल हो गए, किसी ने माँगा ही नहीं।”
पत्नी से कहा तो उनका उत्साह भी कुछ खास नहीं दिखा। उन्होंने सहजता से कहा—
“यहाँ हिंदी में कौन लिखेगा? जैसा मिल रहा है, वैसा ही ठीक है…”
लेकिन हिंदी के प्रति मेरा जुनूनी मन इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं था। मैंने दुकानदार से कहा—
“मैं लिखकर देता हूँ। ख़राब हुआ तो नुकसान मेरा।”
दुकानदार ने कुछ सोचा। शायद उसे भी लगा कि कोशिश करने में क्या हर्ज है। उसने अपनी तरफ से प्रयास किया और आखिरकार केक पर बेटे का नाम हिंदी में लिख ही दिया। 😊
हर जन्मदिन की तरह इस बार भी केक पर बेटे का नाम हिंदी में चमक रहा था और उसे देखकर मेरे मन में एक अलग ही खुशी थी। ❤️
कुछ लोगों के लिए यह सिर्फ एक नाम होगा, लेकिन मेरे लिए यह केक पर नाम लिखवाने भर की बात नहीं थी। यह हैदराबाद में हिंदी के लिए एक छोटी-सी जगह बनाने की कोशिश थी—ऐसे समय में, जब अंग्रेज़ी धीरे-धीरे हमारे रोज़मर्रा के जीवन में अपनी जगह बढ़ाती जा रही है और इस छोटी-सी घटना ने एक बात फिर विश्वास के साथ महसूस कराई—
लोग हिंदी से प्रेम करते हैं, बस उस प्रेम पर हमारा विश्वास बढ़ाने की जरूरत है।
भाषा का सम्मान बड़े-बड़े मंचों से ही नहीं होता;
कभी-कभी वह बच्चे के जन्मदिन के केक पर लिखे उसके नाम से भी होता है। ❤️🎂🇮🇳
कभी-कभी छोटी-सी जिद ही बड़ी याद बन जाती है।
-डॉ साकेत सहाय
०९.०८.२०२६
हैदराबाद
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