Sunday, July 5, 2026

भाषा और तकनीक -जिम्मेदार उपयोग जरूरी

 भाषा और तकनीक -जिम्मेदार उपयोग




आज कृत्रिम मेधा (AI ) हमारे जीवन और कार्यशैली का हिस्सा बन चुकी है। यह लेखन, अनुवाद, शोध और सूचना जुटाने में अत्यंत उपयोगी है, लेकिन यह मान लेना कि एआई कभी गलती नहीं करता, यह एक बड़ी भूल है। आज के युवाओं के लिए तो यह एक अनिवार्य उपयोग का विषय बनता जा रहा है, जो उनके मानसिक विकास में एक बड़ी बाधा सिद्ध हो रही है । 

मशीन भी कभी-कभी ऐसी त्रुटियाँ कर देता है जो पहली नज़र में सही प्रतीत होती हैं, लेकिन तथ्यात्मक या भाषाई दृष्टि से गलत होती है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्यायालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार फर्जी न्यायिक संदर्भों के इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताई गई है। शीर्ष न्यायालय ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा बताते हुए एनसीएलटी का एक फैसला रद्द कर दिया और राष्ट्रीय विधिक आयोग (बीसीआई) से नियम बनाने पर विचार करने को कहा। दरअसल, राष्ट्रीय कंपनी विधिक अधिकरण (NCLT) द्वारा न्यायिक निर्णयों में एआई गढ़े संदर्भ (Fake AI-generated citations) के उपयोग पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की गई है ।  यह मामला न्यायिक चूक से अधिक गंभीर असावधानी का सूचक है जो हमें सावधान करता है कि तकनीक का उपयोग विवेक और सत्यापन के साथ ही किया जाना चाहिए। यह कहा जा सकता है कि  “एआई एक उत्कृष्ट सहायक है, अंतिम निर्णायक नहीं।” 

तकनीक और एआई के दौर में भी तथ्यों की जाँच, भाषा की शुद्धता और विषय का सही ज्ञान उतना ही जरूरी है जितना आज से पहले था ।  आज भी ज्ञान का प्रसार मनुष्य की ही जिम्मेदारी है। दैनिक कार्यजीवन से जुड़े इन दो वाक्यों को ही लें- 
शीर्षक वाक्य -
१.
पर्यटकों की बढ़ती संख्या बने परेशानी।

अर्थ— पर्यटकों की बढ़ती संख्या परेशानी का कारण बन गई।

२.
पर्यटक बनें परेशानी।
अर्थ— पर्यटकों को परेशानी बनने का निर्देश दिया जा रहा है।

केवल ‘बने’ और ‘बनें’ के अंतर ने ही पूरे वाक्य का अर्थ और भाव बदल दिया। यही भाषा की शक्ति है।  आइए, हम सब तकनीक को अपनाएँ, लेकिन भाषा की गरिमा, तथ्य की प्रामाणिकता और अपने विवेक को कभी न छोड़ें। क्योंकि तकनीक गति दे सकती है, परंतु भाषा और विवेक स्पष्टता और विश्वसनीयता देती है।
-डॉ साकेत सहाय 
भाषा-संचार विशेषज्ञ 
#साकेत_विचार #तकनीक #ज्ञान #हिंदी

भाषा और तकनीक -जिम्मेदार उपयोग जरूरी

 भाषा और तकनीक -जिम्मेदार उपयोग आज कृत्रिम मेधा (AI ) हमारे जीवन और कार्यशैली का हिस्सा बन चुकी है। यह लेखन, अनुवाद, शोध और सूचना जुटाने में...