Monday, September 14, 2026

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

 आप सभी को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!🙏

विचार-


हिंदी की लड़ाई आज केवल कार्यालय की फाइलों में नहीं, बल्कि घर, स्कूल, बाजार, रोजगार और सामाजिक प्रतिष्ठा के मैदान में लड़ी जानी है।  हिंदी को केवल मंच पर सम्मान, कार्यालय में पुरस्कार और हिंदी दिवस पर आयोजन-गतिविधियां-मिष्ठान नहीं चाहिए; बल्कि उसे काम की भाषा, ज्ञान की भाषा, तकनीक की भाषा और अवसर की भाषा बनाने पर निरंतर ज़ोर देना होगा। जिस भाषा में रोज़गार और उन्नति का भरोसा नहीं दिखेगा, नई पीढ़ी उससे भावनात्मक रूप से जुड़ी होने के बावजूद व्यवहार में उससे कोसो दूर होती जाएगी।

ऐसे में जवाबदेही आवश्यक है; पुरस्कार एक साधन हैं, परंतु लक्ष्य नहीं। यह चिर सत्य है हिंदी की शक्ति केवल “दंड” से नहीं, दक्षता, अवसर, तकनीकी सामर्थ्य, आर्थिक उपयोगिता और सामाजिक आत्मविश्वास से बनेगी। हिंदी को किसी भारतीय भाषा से युद्ध करना नहीं है; बल्कि उसे तो भारतीय भाषाओं के साथ खड़े होकर अंग्रेज़ी के अनावश्यक वर्चस्व का विकल्प बनना है और इसमें हिंदी की सामूहिकता जरूरी है जो दुर्भाग्य से मंचों या सजावटी भाषणों तक ही दिख रही है ।  हिंदी के प्रयोग वृद्धि का सबसे प्रभावी हथियार लड़ाई, चिंता, शोक, या निराशा नही है । बल्कि संवैधानिक शक्ति , सामूहिक प्रयासों से उसे सक्षम बनाना है कि लोग उसे छोड़ना ही न चाहें जैसे स्वाधीनता आंदोलन के दौरान हिंदी सबकी चहेती थी या आज फ़िल्मी गानों, बाज़ार की भाषा या चुनावी सभाओं में  है । हिंदी दिवस का वास्तविक संकल्प - हिंदी को ऐसी सक्षम, उपयोगी और अवसर देने वाली भाषा बनाएँ कि उसे अपनाना भावना भर नहीं, स्वाभाविक व्यवहार और भविष्य का विकल्प बन जाए।

जय हिंद! जय हिंदी!! जय नागरी!!! 🇮🇳

— डॉ. साकेत  सहाय

हैदराबाद 

१४.०९.२०२६

#साकेत_विचार

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