Tuesday, February 19, 2013

हर क्षेत्र में एकसमान विकास जरुरी


आंकड़ों में दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में गिने जाने वाले भारतवर्ष के समग्र विकास के लिए यह आवश्यक है कि वह अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्त्वपूर्ण तत्त्वों जैसे विनिर्माण, कृषि, शेयर बाजार, सेवा क्षेत्र, ऑटोमोबाइल और खुदरा जैसे क्षेत्रों में आगामी पांच वर्षों में महत्त्वपूर्ण प्रगति दर्शाए।

कृषि-
वैदिक काल से ही हमारी अर्थव्यवस्था मूल रूप से कृषि और पशुपालन पर आधारित रही है। लेकिन उदारीकरण के बाद से यह देखा गया है कि हम कृषि से ज्यादा दूसरी चीजों पर ध्यान दे रहे हैं। जबकि देश के समावेशी विकास के लिए यह आवश्यक है कि कृषि क्षेत्र का त्वरित विकास किया जाए। भारतीय उद्योग परिसंघ ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए एक बीस सूत्रीय कार्यक्रम की सिफारिश की है। जिसमें एक मॉडल लैंड लीजिंग अधिनियम, बीज विधेयक को पारित करना और उसे लागू करना, एक कीट निगरानी प्रणाली बनाना, मनरेगा के तहत वॉटरशेड प्रबंधन और खेती का मशीनीकरण शामिल है। सिंचाई की सुविधा ज्यादा से ज्यादा कृषि योग्य भूमि तक पहुंचाई जानी चाहिए। फिलहाल यह सुविधा 40 फीसदी खेती योग्य जमीन तक ही उपलब्ध है। उपरोक्त प्रस्तावों पर यदि सरकार त्वरित कार्रवाई करे तो हमारी अर्थव्यवस्था की तस्वीर आगामी पांच वर्षों में निश्चय ही बदल जाएगी।
रिटेल- रिटेल क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था की जान है। इसने देश के युवाओं को रोजगार दिलाने में बड़ी भूमिका अदा की है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आने के बाद यह सेक्टर देश में प्रगति के नए दरवाजे खोलेगा। एफडीआई आने से खुदरा क्षेत्र में बड़े निवेश से किसानों को उत्पादकता और आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इससे किसान मार्ट खुलेंगे, जहां किसान अपने सब्जियों की अनिवार्य रुप से बिक्री कर पाएंगे। विनिर्माण - हमारे देश में विकास की सबसे बड़ी बाधा है देश का असमान विकास। शहरों और गांवों के बीच बढ़ती खाई। ग्रामीण इलाकों के बुनियादी ढांचे को एक अभियान के तहत मजबूत बनाने की जरूरत है। इसके लिए देश में सड़कों का व्यापक जाल बिछाए जाने की जरूरत है। राजग सरकार के समय में शुरू की गई परियोजना स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के विस्तार पर फिर से जोर दिया जाए। परिवहन देश की अर्थव्यवस्था की जान होता है। इसलिए सरकार को आगामी पांच वर्षों में देश में अर्थव्यवस्था के मजबूत विकास के लिए रेल, सड़क, पानी, हवाई यातायात इत्यादि परिवहन साधनों के विकास पर जोर देना चाहिए।

सेवा- भारतीय लोग अपने सेवा - सत्कार के लिए विश्व भर में जाने जाते है। हमारे देश में अतिथि देवो भव कहावत प्रचलित है। भारत अपने गौरवमयी ऐतिहासिक धरोहर, महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर, सांस्कृतिक विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसलिए दुनिया भर के पर्यटक भारत की तरफ आंखें फैलाए रहते हैं। ऐसे में सेवा क्षेत्र का बेहतर विकास समय की मांग है। ताकि पर्यटन अर्थव्यवस्था का विकास हो। वर्ष 2020 में विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए यह आवश्यक है कि हम आगामी पांच वर्षों में अर्थव्यवस्था से जुड़े इन सभी बिंदुओं पर अपना ध्यान केंद्रित करें। सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर इन सभी बिंदुओं को अमलीजामा पहनाए तो निश्चय ही हमारी अर्थव्यवस्था की बेहतर तस्वीर उभरेगी।