Tuesday, June 16, 2026

भाषा की दृष्टि



भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना का आधार है। जब भाषा सशक्त होती है, तब विचार सशक्त होते हैं; जब विचार सशक्त होते हैं, तब समाज और राष्ट्र प्रगति के नए आयाम स्थापित करते हैं। कहा जा सकता है-

“किसी राष्ट्र का सबसे बड़ा सामर्थ्य उसकी भाषा होती है। भाषा है तो भाव है, संवाद है, अभिव्यक्ति है, संचार है, विचार है, प्रगति है, सोच है, पारदर्शिता है, जनहित है, राष्ट्रकल्याण है और राष्ट्रभाव है। भाषा केवल शब्दों का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा, संस्कृति और चेतना की संवाहक होती है।”

— डॉ. साकेत सहाय

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भाषा की दृष्टि

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