भाषा और बोली

 #भाषा या बोली में बड़ा तकनीकी अंतर है।लिपिबद्ध हो गई तो भाषा। अन्यथा बोली। हम भारतीय तो सदैव अपनी संस्कृति को मौखिक बोलियों के द्वारा ही संरक्षित करते आए हैं। बोलियाँ ही भाषा को  समृद्ध करती है। आज मजबूरी वश हम अंग्रेजी को समृद्ध कर रहे हैं।  उदाहरण के लिए हम रिश्ते-नाते से जुड़े शब्दों को लें।  क्या जो भाव सम्मान, अपनापन चाचा-चाची  बोलने में है क्या वो भाव अंकल-आंटी बोलने में है।  भाषाएं केवल हमें नहीं बदलती वो हमारी जीवन शैली को बदल देती है।  

अंग्रेजी अपनाए मगर संतुलन के साथ।   साथ ही इस पर हम विचार करें कि यह भाषा हमारी संस्कृति से हमें कितना दूर ले जा रही है।  जरूरत है इस दिशा में सोचा जाए। मैं सभी बोलियों का समर्थक हूँ क्योंकि  हमारी देशी भाषाएँ एंव बोलियाँ हमारी सांस्कृतिक -सामाजिक पहचान है।


#साकेत_विचार

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