प्रयागराज कुंभ हादसा-एक अनहोनी थी, जो घट गई। प्रयागराज में जो हुआ दुखद है, अत्यंत दुखद। प्रयागराज कुंभ में भगदड़ मचने की वजह से असमय ही कुछ लोग काल-कवलित हो गए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन महाकुंभ जैसे अपार जनभागीदारी वाले आयोजन को जिस सुव्यवस्थित तरीके से अब तक आयोजित किया गया, उसे किसी अनहोनी से कमतर नहीं करार दिया जा सकता। अगलगी और फिर भगदड़ के मामले को जिस तीव्रता से नियंत्रित कर स्थिति को सामान्य बनाया गया, यह भी तो गौरतलब है। मैं जहाँ पदस्थापित हूँ उस सुदूर दक्षिण से कई मेरे परिचित सपरिवार महाकुंभ गए, ट्रेन से गए, वहां ठहरे और स्नान संपन्न कर लौट आए। वे सभी उत्साह से परिपूर्ण थे। उन्होंने कहा, करोड़ों लोगों की आवाजाही के बावजूद कुम्भ नगरी की सफाई व व्यवस्था चकित करती थी। उनके लिए सबसे उल्लेखनीय प्रशासन व पुलिस का सहयोग था, जो किसी भी छोटे-बड़े सहयोग के लिए तत्पर दिखते थे। इतने बड़े आयोजन में, दुनिया भर में अनेकों ऐसे उदाहरण है जहाँ अनियंत्रित या अज्ञात भय से अव्यवस्था मची, यहाँ भी भगदड़ मचने की वजह से कुछ लोगों की मौत हुई, जिसे प्रशासनिक चूक या अनहोनी दोनों...
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