Wednesday, December 3, 2025

खुदीराम बोस

 कायस्थ रत्न 💎 

खुदीराम बोस 




सरदार भगत सिंह की चर्चा तो होती ही है किंतु खुदीराम बोस की महिमा को कम कर के आँकना उचित नहीं होगा।

खुदीरामबोस बंगाल के प्रसिद्ध क्रान्तिकारी -युवक थे ।

उन्हें अंग्रेजों ने फांसी की सजा दी थी । खुदीरामबोस गीता की प्रति को गले में लटका कर फांसी पर झूल गये ।

जब लोकमान्य तिलक ने खुदीरामबोस की प्रशंसा में लेख लिखा था, तब इसी लेख को राजद्रोह मान कर अंग्रेजों ने उन्हें ६ साल की सजा सुना दी ।

इसे लेकर मुंबई में जबर्दस्त हडताल हुई ।

खुदीराम बोस की फाँसी की सजा की गूँज

रूस के लेनिन तक भी पँहुची थी !

इस प्रसंग को लेकर २३ जुलाई१९०८ के अपने पत्र >प्रोलेटारी <में लेनिन ने लिखा था >

"भारत में अब सडकें भी अपने लेखकों और राजनैतिक-नेताओं के नाम पर उठ खडी हुई हैं , इस समय अंग्रेजी -सियारों ने भारतीय लोकतन्त्रवादी "तिलक " को जो भयंकर सजा दी थी ,इस प्रकार से थैलीशाहों के नौकरों ने लोकतन्त्र-वाद के विरुद्ध जो बदला लेने वाला कदम उठाया है ,उससे बंबई की सडकों पर हडताल और प्रदर्शन हुए हैं ।"

उस महान देशभक्त की स्मृति को सादर प्रणाम

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