Friday, May 14, 2021

पुस्तक संस्कृति

उत्तर आधुनिक भारतीय किताबें खरीदकर तो कम ही पढ़ते हैं इसीलिए कवर पेज देखकर खुश हो लेते हैं और वो विदेशी हो तो क्या कहना?  जिनकी हिंदी कमजोर है वो भी इतिहास का बखान हिंदी में करके किसी की चिंदी-चिंदी कर डालते हैं और जिनकी अंग्रेजी खराब है वो भी अंग्रेजी देखकर खुश हो लेते हैं ।

सांस्कृतिक विकृति का परिणाम है जन-सामान्य का पुस्तकों से दूर जाना, जो समाज के लिए घातक सिद्ध हो रहा है


#पुस्तक_संस्कृति

#साकेत_विचार 

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